Friday, 22 June 2018

वक़्त से सबको उम्मीदें हैं पर खुद के कर्म मौन है

ज़िंदगी सब जी रहें हैं
पर ज़िंदा कौन है ?

वक़्त से सबको उम्मीदें हैं
पर खुद के कर्म मौन है 

Monday, 18 June 2018

फिर अपना बना कर ही दम लेंगे

ग़लत समझ बैठे थे
कुछ अपने हमें
पर हमने भी ठान ली थी
सफाई नही देंगे
वक़्त ने साथ दिया
तो वक़्त के साथ
 फिर अपना बना कर ही दम लेंगे 

Thursday, 14 June 2018

तुम उसी खुदा के रूप हो जिससे आज नही तो कल तुम खुद मिल जाओगे

मंज़िल मिल जाएगी
या खुद मंज़िल बन जाओगे
भाग्य तुम लिख नही सकते
पर भाग्य तुम खुद बनाओ ,
कदमो पर खुद के तुम यकीन करो
दम है इनमें
तुम कर्म करो ,
मंज़िल मिल जाएगी
या खुद मंज़िल बन जाओगे
क्योकि
तुम उसी खुदा के रूप हो
जिससे आज नही तो कल
तुम खुद मिल जाओगे

Monday, 11 June 2018

जो आज हमने रोटी खाई है वो किस्मत में लिखी थी ?

कहते हैं
किस्मत के लिखे को कोई बदल नही सकता
मेरा ये मानना है
कि किसे पता है
जो आज हमने रोटी खाई है
वो किस्मत में लिखी थी ?
इसलिए
हर पल को सलाम करो
और आगे बढ़ो ..........

Saturday, 9 June 2018

पत्थर सी हो गई ......


मुस्कुराते रहने का हुनर हम पर यूँ भारी पड़ा कि जब गम बताना चाहा तो लोगो ने मज़ाक में दिया उड़ा हमारी आँखों का समुंदर बह नही पाया मन उस तूफान को से नही पाया , तब से मुस्कुराते रहने की अदा से यूँ नफ़रत सी हो गई , खूबसूरत लगती थी जो ज़िंदगी उस पल से पत्थर सी हो गई ......